पीठ की मर्यादा
किसी भी आध्यात्मिक परंपरा की स्थिरता केवल उसके दर्शन से नहीं, बल्कि उसकी मर्यादाओं से भी निर्धारित होती है।
आदिनारायण पीठ की मर्यादा का आधार सत्य, धर्म, करुणा, संयम, गुरु-श्रद्धा, सेवा, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व है।
 
पीठ से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति से अपेक्षा है कि वह:
सत्य का सम्मान करे,
साधना में नियमितता रखे,
गुरु और वरिष्ठ साधकों के प्रति उचित सम्मान रखे,
कनिष्ठ और अन्य साधकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करे,
धन और संसाधनों का दुरुपयोग न करे,
किसी व्यक्ति का शोषण न करे,
भय या दबाव के माध्यम से किसी को पीठ से जोड़ने का प्रयास न करे,
आध्यात्मिक उपलब्धियों का अनावश्यक प्रदर्शन न करे,
पीठ की प्रतिष्ठा के नाम पर अधर्म को उचित न ठहराए,
व्यक्तिगत मत और पीठ के आधिकारिक सिद्धांत में अंतर स्पष्ट रखे
पीठ में श्रद्धा महत्वपूर्ण है, लेकिन श्रद्धा के नाम पर विवेक और स्वतंत्र चेतना को समाप्त करना इस परंपरा का उद्देश्य नहीं है। इसी प्रकार गुरु-सेवा और दान भी स्वेच्छा, श्रद्धा और सामर्थ्य पर आधारित होने चाहिए। मर्यादा का उद्देश्य व्यक्ति को दबाना नहीं, साधना और परंपरा को सुरक्षित रखना है।