पीठ का उद्देश्य
आदिनारायण पीठ के उद्देश्य को केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं किया गया है। इसका व्यापक उद्देश्य मनुष्य के आंतरिक विकास, आध्यात्मिक जागरण और लोकमंगल के बीच संतुलन स्थापित करना है।
पीठ के प्रमुख उद्देश्य हैं:
1. नारायण तत्त्व का जागरण
मनुष्य के भीतर निहित चेतना, करुणा, संतुलन, धर्म और उत्तरदायित्व की भावना को विकसित करना।
2. माया की समझ
माया को केवल संसार को मिथ्या कहने के रूप में नहीं, बल्कि उस मानसिक पहचान और आसक्ति के रूप में समझना जो परिवर्तनशील वस्तुओं को अंतिम सत्य मान लेती है।
3. अष्टपाश की पहचान
भय, मोह, अहंकार, लोभ, आसक्ति और अन्य आंतरिक बंधनों को पहचानना और उनसे क्रमशः स्वतंत्र होने की साधना करना।
4. शिव तत्त्व की साधना
साक्षीभाव, वैराग्य, निर्भयता, आंतरिक मौन और स्वतंत्र चेतना की दिशा में साधक का विकास।
5. गुरु-शिष्य परंपरा
योग्य गुरु और आचार्यों के माध्यम से ज्ञान, साधना और परंपरा को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाना।
6. साधना का प्रसार
योग, ध्यान, मंत्र, नाद, मौन, स्वाध्याय, तप और आत्मनिरीक्षण जैसी साधनाओं को व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराना।
7. लोकमंगल
आध्यात्मिक विकास को समाज और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी से जोड़ना।
8. आध्यात्मिक साहित्य
दर्शन, साधना और जीवन से संबंधित ज्ञान को ग्रंथों के माध्यम से सुरक्षित और व्यवस्थित करना।
9. साधक निर्माण
केवल अनुयायी या सदस्य नहीं, बल्कि अनुशासित, जागरूक और जिम्मेदार साधकों का निर्माण करना।
10. मोक्ष की दिशा
साधक को बाहरी पहचान से आगे बढ़ाकर आत्म-जागरण, स्वतंत्रता और मोक्ष की दिशा में ले जाना।
पीठ का उद्देश्य संख्या बढ़ाना नहीं, चेतना जगाना है।