आचार्य मंडल
आदिनारायण पीठ में आचार्य उस व्यक्ति को माना जाता है जो परंपरा के दर्शन, साधना, मर्यादा और शिक्षण को समझकर उसे योग्य रूप से आगे ले जाने की क्षमता रखता हो। आचार्य पद केवल सम्मान या पदवी नहीं, बल्कि एक गंभीर जिम्मेदारी है।
एक आचार्य से अपेक्षित है कि उसमें:
दर्शन का पर्याप्त ज्ञान हो, 
नियमित साधना का अनुभव हो, 
गुरु-परंपरा के प्रति निष्ठा हो, 
चरित्र और आचरण में स्थिरता हो, 
साधकों का मार्गदर्शन करने की क्षमता हो, 
संगठनात्मक जिम्मेदारी निभाने की योग्यता हो, 
विनम्रता और उत्तरदायित्व हो, 
व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर परंपरा के हित को रखने की क्षमता हो.
आचार्य मंडल का उद्देश्य पीठ के विभिन्न कार्यों को व्यवस्थित रूप से संचालित करना और साधकों को उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है।
आचार्य अपने क्षेत्र में स्वतंत्र जिम्मेदारी निभा सकता है, लेकिन पीठ के मूल दर्शन, मर्यादा और परंपरा से जुड़ा रहता है।
आचार्य का पद अधिकार से अधिक उत्तरदायित्व है।
आचार्य व्यक्ति है; परंपरा उससे बड़ी है।