ॐ नमो नारायण
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आदिनारायण पीठ

आदिनारायण पीठ एक आध्यात्मिक परंपरा, साधना-पथ और जीवन-दृष्टि के रूप में विकसित होने वाली संस्था है। इसका मूल उद्देश्य मनुष्य के भीतर निहित नारायण तत्त्व को जागृत करना, माया और आंतरिक बंधनों को समझना तथा साधक को शिव तत्त्व, अघोर और मोक्ष की दिशा में अग्रसर करना है।
पीठ की स्थापना

आदिनारायण पीठ की स्थापना एक ऐसे आध्यात्मिक मार्ग को व्यवस्थित रूप देने के संकल्प से की गई है जिसमें दर्शन, साधना, गुरु-शिष्य परंपरा, अनुशासन, सेवा और लोकमंगल एक साथ जुड़े हों।
पीठ की स्थापना का आधार किसी अन्य परंपरा का विरोध नहीं, बल्कि एक स्पष्ट और व्यवस्थित साधना-दृष्टि का निर्माण है।

हमारा दर्शन
आदिनारायण पीठ का दर्शन मनुष्य को जीवन और चेतना की एक क्रमिक यात्रा के रूप में देखता है।
इस दर्शन का केंद्रीय विचार है:
“प्रत्येक मनुष्य में नारायण तत्त्व निहित है।”
मनुष्य के भीतर यह संभावना मौजूद है कि वह अपने सीमित अहंकार, भय, मोह और आसक्ति को पहचानकर चेतना के उच्चतर स्तर की ओर बढ़े।
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पीठ का उद्देश्य
- नारायण तत्त्व का जागरण
- माया की समझ
- अष्टपाश की पहचान
- शिव तत्त्व की साधना
- गुरु-शिष्य परंपरा
- साधना का प्रसार
- लोकमंगल
- आध्यात्मिक साहित्य
- साधक निर्माण
- मोक्ष की दिशा
नारायण तत्त्व
आदिनारायण पीठ के दर्शन का प्रथम और केंद्रीय आधार नारायण तत्त्व है।
नारायण तत्त्व का अर्थ केवल किसी देवता की बाहरी उपासना तक सीमित नहीं है। यह मनुष्य के भीतर स्थित उस चेतना की ओर संकेत करता है जिसमें धारण, संतुलन, धर्म, करुणा, उत्तरदायित्व और लोकमंगल की भावना विकसित होती है।
जब व्यक्ति अपने जीवन में सत्य, संयम, करुणा, विवेक, उत्तरदायित्व और सेवा को विकसित करता है, तब यह तत्त्व व्यवहार में प्रकट होने लगता है।